दुष्कर्म के आरोपी पूर्व सरकारी अधिवक्ता को हाईकोर्ट ने दी अंतरिम जमानत; पीड़िता के वकील ने कहा- हम दोबारा विवेचना की करेंगे मांग

इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ खंडपीठ ने गुरुवार को एक जूनियर महिला अधिवक्ता से दुष्कर्म ​​​​​करने के मामले में अभियुक्त पूर्व अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता शैलेन्द्र सिंह चौहान को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि गिरफ्तारी होने पर अभियुक्त को अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया जाए। कोर्ट ने पीड़ित और अपर शासकीय अधिवक्ता को याचिका पर आपत्ति दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय भी दिया है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।

पैसे ऐंठने के लिए लगाया गया झूठा आरोप
यह आदेश जस्टिस चन्द्रधारी सिंह की बेंच ने अभियुक्त शैलेंद्र सिंह चौहान की अग्रिम जमानत याचिका पर दिया। अभियुक्त की ओर से दलील दी गई कि वह एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता है व हाईकोर्ट में 29 वर्षों से प्रैक्टिस कर रहा है। वह अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता का कार्यभार संभालने के साथ-साथ विभिन्न सरकारी विभागों व निगमों का भी अधिवक्ता रहा है। कहा गया कि याची से पैसे ऐंठने के लिए व विभूति खंड में स्थित उसका चैम्बर हथियाने के लिए उसे झूठा फंसाया गया है।

पीड़ित के वकील ने कहा- विवेचना को प्रभावित कर सकता है आरोपी

याची की ओर से बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ज्योतिंद्र मिश्र ने तर्क दिया कि पीड़ित के अनुसार उसे सेब के जूस में नशीला पदार्थ भी पिलाया गया था, जबकि मेडिकल जांच में इस तथ्य की भी पुष्टि नहीं हो सकी है। वहीं, पीड़ित के अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए दलील दी कि याची एक प्रभावशाली व्यक्ति है, वह बाहर रहते हुए विवेचना को प्रभावित कर सकता है। पीड़ित की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले की जांच सीबीआई से कराए जाने व विवेचना को उत्तर प्रदेश से बाहर कराए जाने की मांग की गई है।



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कोर्ट ने पीड़ित और अपर शासकीय अधिवक्ता को याचिका पर आपत्ति दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय भी दिया है।

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