70 साल में पहली बार बारावफात का जुलूस इस बार कोरोना की वजह से नहीं निकलेगा, कमेटी को जिला प्रशासन की गाइडलाइन का इंतजार

मोहम्‍मद साहब की यौमे पैदाइश ईद मिलादुन्नबी (बारावफात) पर इस बार कोरोना की वजह से 29 अक्टूबर का जुलूस नहीं निकल पाएगा। मरकजी यौमुन्नबी कमेटी के पदाधिकारियों ने शनिवार को दाल-मंडी में बैठक कर निर्णय लिया कि शासन के गाइडलाइन पर ही परम्पराओं का निर्वहन किया जाएगा। कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व चेयरमैन अल्पसंख्यक आयोग शकील अहमद ने बताता की यह जुलूस हर साल बेनियाबाग हड़हा मैदान से उठकर नारियल बाजार ,नई सड़क, छत्ता-तले, लंगड़े हाफिज से होते हुए कई किलोमीटर का सफर तय कर भीखा शाह गेट पर समाप्त होता है। इस बार हम लोगों ने पहले से ही मुसाफिर खाने का हॉल बुक कर लिया है, वहां आयोजन होगा।

ईद मिलादुन्नबी पर हर साल तंजीमों का विशाल जुलूस निकलता था

काशी में जुलूसों में नबी के आने का पैगाम देतीं हरी झंडियों के साथ तिरंगा भी खूब लहराया जाता है। जो इस बार कोरोना के चलते नहीं दिखेगा। शकील अहमद ने बताया 27 तारीख को प्रशासन ने गाइडलाइन देने को कहा है।हम सब खुदी तैयार है कि हिंदू भाइयों का त्योहार भी सिमट गया है। हम सब एक साथ महामारी के खिलाफ लड़ रहे है।

कोरोना ने सारे मामले बिगाड़ दिए हैं, हम सभी एक साथ मिलकर लड़ेंगे

मरकजी कमेटी इस बार दिशा निर्देशों का इंतजार कर रही है।सोशल डिस्टेंसिंग के साथ हम सभी सब कुछ मानने को तैयार है। कोरोना ने पूरी दुनियां में हर काम को रोक रखा है।जुलूस में तो बहुत भीड़ होती है। अभी महामारी से निजात नही मिला है। इस बार जुलूस पर संशय है।



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मरकजी यौमुन्नबी कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व चेयरमैन अल्पसंख्यक आयोग(उत्तर प्रदेश ) शकील अहमद दालमंडी स्थित मुसाफ़िर खाने में जानकारी दिया। 

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