विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मामले में दोनों पक्षों की बहस के बाद जिला जज ने आदेश सुरक्षित रखा, कल आ सकता है फैसला

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मामले को लेकर जिला अदालत ने मंगलवार को सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सिविल रिवीजन पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में बुधवार को आदेश आने की संभवना है। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सिविल कोर्ट में रिवीजन डाला था कि मामला वक्फ बोर्ड का है। इसकी सुनवाई भी लखनऊ में होनी चाहिए। इस पर आज फैसला सुरक्षित रख लिया गया है।

दरअसल 6 अक्टूबर को वाराणसी के जिला जज ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के रिविजन में देर होने की वजह से 3 हजार रुपए के हर्जाने के साथ स्वीकार किया था। इसकी सुनवाई 13 अक्टूबर को होनी थी। उसी बहस को आज पूरा किया गया। इसी कड़ी में इस रिवीजन के एडमिशन पर आज बहस हुई पूरी, जिसमें मंदिर और मस्जिद दोनों ही पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रखी।

पुरातात्विक सर्वेक्षण को लेकर 1991 से चल रहा है मुकदमा
विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी के पुरातात्विक सर्वेक्षण को लेकर मुकदमा 1991 से स्थानीय अदालत मे चल रहा है। पूर्व शासकीय अधिवक्ता और वादी विजय शंकर रस्तोगी ने बताया कि 1991 से दायर मुकदमा में मांग की गई थी कि मस्जिद, ज्योतिर्लिंग विश्वेश्वर मंदिर का एक अंश है। जहां हिंदू आस्थावानों को पूजा-पाठ, दर्शन और मरम्मत का अधिकार है।

कोर्ट से ये मांग स्वयंभू ज्योतिर्लिंग विश्वेश्वर के पक्षकार पंडित सोमनाथ व्यास ने किया था। मुकदमे में अंजुमन इंतजामिया मस्जिद तथा अन्य सुन्नी वक्फ बोर्ड हैं। पूरे मामले में वादी के तौर पर स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर काशी विश्वनाथ तथा प्रतिवादी प्रथम पक्ष अंजुमन इंतजामियां तथा द्वितीय पक्ष सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड लखनऊ हैं।



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जिला अदालत ने मंगलवार को सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सिविल रिवीजन पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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