पत्थरों को जोड़कर भक्त बना रहे घरौंदा; यहां त्रिकोण पथ पर ऐसा करने से पूरा होता है अपने आशियाने का सपना

शारदीय नवरात्रि का आज पांचवां दिन है। भक्त सुख शांति की कामना के लिए आज मां दुर्गा के पांचवें स्वरुप स्कंदमाता की अराधना कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित मां विंध्याचल धाम में भी भक्त पूजा-पाठ के लिए पहुंच रहे हैं। यहां विंध्य पर्वत के इशान कोण पर माता विंध्यवासिनी विराजमान हैं। यहां मान्यता है कि पर्वत के त्रिकोण पथ पर पत्थरों को जोड़कर घरौंदा बनाने से अपना आशियाना होने का सपना साकार होता है। ऐसे में इन दिनों लोग पत्थरों को जोड़ जोड़कर घरौंदा बना रहे हैं।

घरौंदा बनातीं महिलाएं।

त्रिकोण पथ पर विराजमान महाकाली व सरस्वती देती हैं दर्शन

आचार्य राजन मिश्र ने कहा कि, जगत का पालन करने वाली माता बड़ी दयालु हैं। विंध्य धाम वह परम पावन धाम है, जहां मन से मांगी गयी हर मुराद पूरी होती है। विंध्य पर्वत पर विराजमान आदिशक्ति माता विंध्यवासिनी धाम के त्रिकोण पथ पर काली खोह में महाकाली, पहाड़ पर विराजमान माता अष्टभुजा सरस्वती के रूप में भक्तों को दर्शन देती हैं। त्रिकोण पथ पर श्रद्धा भक्ति के साथ माता के ध्यान में मग्न भक्तगण अपनी मुरादों को पूरा करने कि कामना के साथ दर्शन पूजन करते हैं।

जितने तल का घरौंदा, उतना बड़ा मकान का सपना होता है पूरा

मान्यता के अनुसार विंध्य पर्वत पर एक-एक पत्थर को जोड़कर प्रतीकात्मक घरौंदा बनाने वाले भक्तों को उनके आलीशान मकान का सपना साकार होता है। जितने तल का मकान बनाया जाता है, माता की कृपा से उतने तल का मकान बनवाने का सपना भक्त का माता रानी पूरा करती हैं। मान्यता के अनुसार भक्त शीला देवी, सोनू एवं रानी ने घरौंदा बनाया।



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यह फोटो विंध्याचल धाम की है। यहां त्रिकोण पत्र पर पत्थरों को जोड़कर घरौंदा बनाते श्रद्धालु।

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