कमीशन के मनी ट्रेल को खंगाल रही CBI; दोनों आरोपियों की बढ़ी रिमांड, 100 करोड़ के संदिग्ध लेन देन पर नजर

सपा सरकार के कार्यकाल में अंजाम दिए गये गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गये अधीक्षण अभियंता रूप सिंह यादव और कार्यालय सहायक राजकुमार यादव को सीबीआई के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने चार दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड बढ़ा दी। जिसके बाद बीती देर को दोनों से सीबीआई के अधिकारियों ने बारी–बारी से गहन पूछताछ की। दोनों से रिवर फ्रंट का निर्माण कार्य करने वाली कंपनियों और ठेकेदारों से लिए गये कमीशन के बारे में सख्ती से पूछताछ की गयी है। इस दौरान बाकी आरोपित इंजीनियरों समेत आधा दर्जन से ज्यादा सिंचाई विभाग के अधिकारियों को बुलाकर आमना–सामना भी कराया गया। देर रात तक नवल किशोर रोड़ स्थित सीबीआई मुख्यालय में सिंचाई विभाग के इंजीनियरों से पूछताछ का सिलसिला जारी था।

दरअसल सीबीआई ने पांच दिन पहले रूप सिंह यादव और राजकुमार यादव को रिवर फ्रंट के निर्माण कार्य में घोटाला अंजाम देने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया था कि दोनों ने बाकी इंजीनियरों की मिलीभगत से फर्जी वर्क आर्डर तैयार कर ठेकेदारों को भुगतान कर दिया। साथ ही शासन के निर्देशों के विपरीत जाकर महंगी दरों पर सामान की खरीद–फरोख्त कर करोड़ों रुपये कमीशन लिया।

100 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेन देन की जानकारी

सीबीआई के सूत्रों की माने तो अब तक की जांच में करीब सौ करोड़ रुपए के लेन–देन को संदिग्ध पाया गया है जो रिवर फ्रंट का निर्माण करने वाली विभिन्न कंपनियों और ठेकेदारों के बैंक खातों से हुआ है। अब सीबीआई बारी–बारी से आरोपित इंजीनियरों के अलावा कंपनी के अधिकारियों और ठेकेदारों को तलब कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बैंकों से निकाली गयी इस रकम का इस्तेमाल किस कार्य में हुआ था।

दरअसल सीबीआई को शक है कि यह रकम इंजीनियरों को कमीशन बांटने के लिए निकाली गई थी। वहीं दूसरी ओर सीबीआई के सामने पेश हुए बाकी आरोपित इंजीनियरों ने कबूला है। कि उन्होंने ज्यादातर कार्य रूप सिंह यादव के आदेश पर किए थे। जिसके बाद उनका रूप सिंह यादव से आमना–सामना कराते हुए तमाम सवाल पूछने का सिलसिला जारी था।

कमीशन को लेकर सीबीआई ने पूछे कई सवाल

सीबीआई टीम के सूत्र के अनुसार आरोपी अभियंता ने कबूला कि अभियंताओं के पास कमीशनखोरी की जो रकम आई उसे उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर निवेश कर दिया। खास तौर पर महिलाओं के नाम पर। इसे आरोपियों ने आयकर की धाराओं की आड़ में कानूनी जामा पहनाने की कोशिश की।

सूत्र बताते हैं कि पूर्व में प्रवर्तन निदेशालय ने भी इस मामले में जो छानबीन की थी उसमें भी यह तथ्य सामने आए थे। सीबीआई टीम ने दोनों गिरफ्तार आरोपियों से पूछा कि डेढ़ हजार करोड़ से अधिक की लागत की इस परियोजना में 90 फीसदी बजट सिर्फ 60 फीसदी काम पर खर्च कर दिया गया।

बजट को चरणबद्ध तरीके से व्यय किया जाता है। किसी भी परियोजना में हर काम के लिए अलग मद निर्धारित किया जाता है। परियोजना के कार्य और व्यय पर लेखा की नजर होती है। हर कदम की रिपोर्ट सरकार को भेजी जाती है। ऐसे में वह लोग किस तरह मनमानी कर सके। उनकी मनमानी पर किसी तरह की आपत्ति क्यों नहीं हुई। इस अनियमितता में कमीशन कि जो बंदरबांट हुई उसमें कौन कौन शामिल था।



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सीबीआई के सूत्रों की माने तो अब तक की जांच में करीब सौ करोड़ रुपए के लेन–देन को संदिग्ध पाया गया है जो रिवर फ्रंट का निर्माण करने वाली विभिन्न कंपनियों और ठेकेदारों के बैंक खातों से हुआ है।

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