साइकिल यात्रा कर किसानों को जागरुक कर रहा युवक, अब तक 22 हजार किलोमीटर की कर चुका है यात्रा

किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरुक करने के लिए नीरज प्रजापति साइकिल से यात्रा कर रहा है। उसने यात्रा को मिशन आर्गेनिक नाम दिया है। नीरज का लक्ष्य 1 लाख 11 ह​जार 111 किलोमीटर साइकिल से यात्रा करना है। नीरज यात्रा के दौरान किसानों के बीच जाकर उन्हें जैविक खेती के प्रति जागरूक करता है और बताता है कि आज के परिवेश में जैविक खेती क्यों जरूरी है और कैसे इससे अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। अपनी इस यात्रा के चलते लोग उन्हें अब बाइसकिल मैन के नाम से जानने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार, मूल रूप से नीरज प्रजापति हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव आहुलाना के रहने वाले हैं। नीरज अपनी साइकिल यात्रा के दौरान शुक्रवार को मेरठ में बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान पर पहुंचे। यहां दैनिक भास्कर से खास बातचीत में बताया कि उन्होंने अपनी इस यात्रा की शुरूआत 9 अप्रैल 2019 को की थी। तब से वह अपनी मिशन आर्गेनिक यात्रा के तहत 20095 किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं।

नीरज का कहना है कि वह लुधियाना में थे तब वह रेलवे रिजर्वेशन की जानकारी लोगों को ऑनलाइन पता कर बताते थे। लुधियाना में रहने के दौरान उनसे लोग श्रीगंगानगर बीकानेर जाने वाली ट्रेन के बारे में अधिक जानकारी करते थे। इस ट्रेन में अधिक यात्री कैंसर से पीड़ित रहते हैं जो श्रीगंगानगर बीकानेर अपना इलाज कराने के लिए जाते हैं। जब उन्होंने देखा कि यह सब पंजाब के लोग हैं जो खाद्य पदार्थों में केमिकल के उपयोग किये जाने की वजह से कैंसर का शिकार हुए हैं। तब उन्होंने तय किया कि वह किसानों को जागरूक करेंगे और उन्हें जैविक खेती के प्रति जागरूक करेंगे।

साइकिल यात्रा पर निकले नीरज।
साइकिल यात्रा पर निकले नीरज।

कोरोना महामारी के बीच भी किसानों के बीच सक्रिय रहे
कोरोना महामारी से पहले वह 23 फरवरी से 22 मार्च 2020 तक राजस्थान में रहे और वहां के किसानों से बातचीत की। नीरज प्रजापति बताते हैं कि कोरोना कॉल में किसानों ने काफी कुछ सीखा है, उन्होंने जान लिया है कि हमें कोरोना जैसी बीमारी से बचने के लिए जैविक खेती की ओर ही लौटना होगा। खेती में केमिकल का इस्तेमाल बंद करना होगा ताकि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सके।

अपने अनुभवों को साझा करते हुए नीरज ने बताया कि जब वह किसानों के पास जाते हैं तो उनके सामने सबसे बड़ी समस्या मार्केटिंग की आती है। किसान जैविक खेती करने के लिए तैयार हैं लेकिन उन्हें जैविक उत्पाद बेचने के लिए सही बाजार नहीं मिलता जिस कारण फसल के दाम अच्छे नहीं मिलते। इस समस्या का समाधान तभी हो सकता है कि जब राज्य सरकारें इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम बढ़ाए। किसानों के सामने नई तकनीक, उन्नत बीज आदि समय से न पहुंचने की समस्या भी है। यदि किसानों को समय से जानकारी मिले तो खेती की दशा दिशा और बदली जा सकती है।

बीएससी पास हैं नीरज

नीरज ने बताया कि वह लगातार अपने मिशन के तहत साइकिल यात्रा नहीं करते हैं। वह एक स्टेट में कुछ दिन अपनी यात्रा करते हैं और इस दौरान वहां के कृषि​ विज्ञान केंद्रों पर जाकर वहां कृषि विशेषज्ञों से नई जानकारी हासिल कर उन्हें किसानों तक पहुंचाने का काम करते हैं। कृषि विशेषज्ञों से मिली जानकारी और किसानों के अनुभवों को भी दूसरे स्थान के किसानों के साथ शेयर करते हैं। यूपी में नीरज ने अपनी यात्रा की शुरूआत 28 अक्टूबर को की थी। अभी तक वह हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, यूपी और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों की यात्रा कर चुके हैं।



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किसानों को आर्गेनिक खेती के प्रति जागरुक करने के लिए निकाली साइकिल यात्रा।

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