BKU अध्यक्ष नरेश टिकैत बोले- अड़ियल रवैया छोड़ किसानों की बात मानें सरकार, हम नहीं चाहते PM सर झुकाकर बात करें

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को आज एक महीना हो गया। आज एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी के जन्मदिवस के मौके पर किसानों को समझाने की कोशिश की। लेकिन किसान झुकने के लिए तैयार नहीं हैं। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि सरकार अपना अड़ियल रवैया छोड़कर दो कदम आगे आए तो किसान भी दो कदम आगे बढ़ेंगे। इसी से धरने का हल निकल सकता है।

दरअसल, BKU अध्यक्ष नरेश टिकैत शुक्रवार को शामली में अपने एक संगठन पदाधिकारी की तेरहवीं संस्कार में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। टिकैत ने कहा कि सर्दी की वजह से बहुत से हमारे किसान शहीद हो चुके हैं। सरकार को अब किसानों की बात मान लेनी चाहिए। इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर नहीं चलना चाहिए। हम प्रधानमंत्री के रुप में नरेंद्र मोदी का सम्मान करते हैं और हम नहीं चाहते कि वह सर झुका कर बात करें। किसानों का सर भी ऊंचा करें।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को तीनों कृषि बिल वापस ले लेना चाहिए। यदि किसानों की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आगामी 26 जनवरी को किसान अपने ट्रैक्टर ट्रॉली समेत गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होंगे।

BJP के मंत्री-विधायक अनर्गल आरोप लगाना बंद करें

नरेश टिकैत ने कहा कि कृषि कानून के विरोध में 40 से अधिक किसान संगठन विरोध कर रहे हैं और भाजपा के विधायक, मंत्री अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। किसान संगठनों के बीच फूट डालने का काम कर रहे हैं।इस दौरान उन्होंने यह भी साफ किया कि किसानों के बीच में कानून वापसी को लेकर कोई मतभेद नहीं है। इस मुद्दे पर सभी किसान एकजुट हैं। सरकार को आरोप लगाने की बजाय मुद्दे पर बातचीत करनी चाहिए। मुद्दे को सुलझाने के लिए सरकार व किसान दोनों को दो कदम पीछे हटना चाहिए। आंदोलन को लंबा खींचने से जहां देश को प्रतिदिन 35 करोड़ का नुकसान हो रहा है। वहीं किसान के नुकसान का अंदाजा लगाना मुश्किल है।

भारतीय किसान यूनियन अध्यक्ष नरेश टिकैत।

UP और हरियाणा में BJP की सरकार, मगर गन्ने के रेट में फर्क
हमारा सरकार के साथ में किसी तरह का टकराने का इरादा नहीं है। लेकिन किसानों की बहुत सारी समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां हरियाणा में भी भाजपा सरकार है, वहां गन्ने का 360 प्रति कुंतल मूल्य दिया जा रहा है। किसानों को सस्ते दामों पर मात्र 200 प्रति माह की दर से बिजली दी जा रही है। जबकि उत्तर प्रदेश में गन्ने का मूल्य 220 से 225 प्रति कुंतल है। जबकि यहां बिजली काफी महंगी है। यह उत्तर प्रदेश के किसानों के साथ नाइंसाफी हो रही है।



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भारतीय किसान यूनियन अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत (बीच में)।

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