मथुरा में महिलाओं के साथ किसानों ने दिल्ली कूच किया; बोले- जब तक मांग नहीं होगी पूरी, तब तक वहीं रहेंगे

कृषि बिलों के खिलाफ दिल्ली में चल रहे किसानों के प्रदर्शन की चिंगारी अब धीरे-धीरे UP के जिलों तक पहुंचने लगी है। गुरुवार को मथुरा से किसान दिल्ली में प्रदर्शन में शामिल होने के लिए रवाना हुए। किसानों के इस जत्थे में महिलाएं भी हैं। किसानों ने कहा कि, जब तक कानून को वापस नहीं लिया जाता है, तब तक वे दिल्ली में ही रहेंगे।

कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन का आज आठवां और अहम दिन है। आज एक बार फिर सरकार व किसानों के बीच बैठक होनी है। इससे पहले एक दिसंबर को सरकार ने पंजाब और UP के किसानों से अलग-अलग बात की थी। यह बैठक बेनतीजा रही थी।

नारेबाजी कर जताया रोष

दरअसल, भारतीय किसान यूनियन (BKU टिकैत गुट) से जुड़े पदाधिकारी व किसान गुरुवार को एक्सप्रेस-वे पर एकत्रित हुए और फिर वहां से नारेबाजी करते हुए दिल्ली के लिए कूच किया। BKU के तहसील अध्यक्ष रोहताश चौधरी ने कहा कि हमारे तहसील के जो पदाधिकारी और कार्यकर्ता हैं, वह राष्ट्रीय नेतृत्व और राकेश टिकैत के आदेश पर दिल्ली कूच कर रहे हैं। जब तक निर्णय नहीं होगा, तब तक दिल्ली रहेंगे।

किसानों के आंदोलन करने की वजह क्या है?

मोदी सरकार संसद के पिछले सत्र में खेती से जुड़े तीन कानून लेकर आई थी। ये तीन कानून हैं: कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन-कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020। ये तीनों कानून संसद के दोनों सदनों से पारित हो भी चुके हैं और कानून बन चुके हैं। भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह का कहना है कि ये कानून खेती-किसानी की कब्र खोदने के लिए बनाए गए हैं। इन्हीं तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग पर किसान आंदोलन कर रहे हैं।



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यह फोटो मथुरा की है। यहां से किसानों ने दिल्ली प्रदर्शन में शामिल होने के लिए गुरुवार को कूच किया है।

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