UP विधान परिषद में रिक्त होंगी 11 सीटें; सदन में बढ़ेगी भाजपा की ताकत, कई नेताओं का खत्म का होगा कार्यकाल

उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से नया साल 2021 सत्तारूढ़ दल भाजपा के लिए मुफीद रहेगा। 30 जनवरी 2021 को 11 सीटें रिक्त होने के बाद विधान परिषद में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) की संख्या घटेगी तो भाजपा के सदस्य बढ़ेंगे। इससे परिषद में सरकार को काफी राहत मिलेगी। विधान परिषद में योगी सरकार अल्पमत में है। ऐसे में सरकार को कई मौकों पर विधायी कार्य निपटाने में राजनीतिक दिक्कत का सामना करना पड़ता है। मगर नए साल (2021) से इस स्थिति में भाजपा के लिए थोड़ी राहत शुरू होगी।

आगामी 30 जनवरी 2021 को विधानसभा क्षेत्र की परिषद में 11 सीटें रिक्त हो रही हैं। एक सीट नसीमुद्दीन सिद्दीकी की सदस्यता रद्द होने से पहले से ही रिक्त चल रही है। परिषद की सीटें ही रिक्त नहीं हो रही हैं बल्कि वहां की संवैधानिक सीटें भी इसके साथ रिक्त होंगी।

परिषद के सभापति रमेश यादव‚ उप मुख्यमंत्री व नेता सदन डॉ दिनेश शर्मा‚ नेता विपक्ष अहमद हसन के साथ ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह का कार्यकाल भी खत्म होगा। इनके साथ ही आशू मलिक‚ रामजतन राजभर‚ वीरेन्द्र सिंह‚ साहब सिंह सैनी‚ धर्मवीर सिंह अशोक‚ प्रदीप कुमार जाटव‚ लक्ष्मण प्रसाद आचार्य का कार्यकाल भी खत्म होगा।

ये है विधान परिषद की सीटों का गणित
सौ सदस्यों वाली विधान परिषद में अभी तीन सीटें रिक्त हैं। बीते दिनों शिक्षक और स्नातक क्षेत्र की कुल 11 सीटों पर चुनाव हुआ था। सदन में सपा के 50 सदस्य हैं। इनमें से छह सदस्य रिटायर होंगे। ऐसे में सपा सदस्यों की संख्या घटकर 44 रह जायेगी। विधानसभा में सपा की सदस्य संख्या के आधार पर इस पार्टी को चुनाव होने कर एक सीट का ही फायदा होगा।

ऐसे में सदन में सपा की संख्या 45 हो सकेगी। विधान परिषद में भाजपा के 25 सदस्य हैं। आगामी 30 जनवरी को उसके तीन सदस्य रिटायर होंगे। ऐसे में भाजपा की संख्या घटकर 22 रह जायेगी। विधानसभा में विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा को रिक्त होने वाली इस 11 सीटों के साथ ही पहले से रिक्त चल रही एक सीट यानि 12 सीटों में से भाजपा के खाते में दस सीटें तक आने की उम्मीद है। ऐसे में भाजपा की सदन में सदस्य संख्या 32 हो सकती है।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर दल बदलू कानून हुआ लागू
उधर बसपा की आठ सदस्य संख्या में से 30 जनवरी 2021 को दो सीटें रिक्त हो रही हैं। बसपा कोटे के ही नसीमुद्दीन सिद्दीकी की सदस्यता दलबदल कानून में खत्म हो चुकी है। ऐसे में बसपा की छह सीटें रह जायेंगी। विधानसभा में सदस्य संख्या के बूते बसपा को सीधे तो कोई सीट मिलना मुश्किल होगा मगर यदि विपक्षी दलों से तालमेल हुआ तो उसे एक सीट मिल सकती है। यदि ऐसा हुआ तो बसपा की परिषद में सदस्य संख्या 7 हो सकेगी।



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आगामी 30 जनवरी 2021 को विधानसभा क्षेत्र की परिषद में 11 सीटें रिक्त हो रही हैं। नए साल में विधान परिषद का नजारा बदला बदला दिखेगा।

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